शनिवार, दिसंबर 31, 2011

दोहा 6

हो गई जिसपे मेहरबान नज़र
सनसनीखेज हो गई है खबर


पाँव रखना ज़रा हौले हौले
लग ना जाए कही दुनियाँ की नज़र


टूट कर गिर रही कैसी बिजली
सब ने सोचा के  अब तो होगा कहर


मेरा बिराना दिल तो सब्ज हुआ
मेरी रातों को मिल गया है सहर


अपनी आंखों में बस के रहने दो
मेरे नसीब का है तेरा सहर

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