कविता मेरी ज़िन्दगी है
शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011
रुबाई - 12
उम्र कट जाएगी वीरानों में
किस्से रह जाएंगें फसानों में
करेंगें ज़िक्र मेरा लोग कभी
कैस, फरहाद से दीवानों में
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