घिर आए मेघ पिया तुम न आए
होता क्यों महीना सावन का सुहाना
पाती में लिख भेजी तुमने बहाना
सौतन की याद में मुझे बिसराए
घिर आए मेघ पिया तुम न आए
जाने क्यों आती है जालीम जवानी
होती क्यों गौरा सब साजन सयानी
निष्ठूर निर्दयी तेरी यादें सताए
घिर आए मेघ पिया तुम न आए
मालुम जो होता की निष्ठुर हो राजा
बजवाते क्यों बाबा देहरी पे बाजा
अच्छा था रह जाती मैं बिना ब्याहे
घिर आए मेघ पिया तुम न आए
होता क्यों महीना सावन का सुहाना
पाती में लिख भेजी तुमने बहाना
सौतन की याद में मुझे बिसराए
घिर आए मेघ पिया तुम न आए
जाने क्यों आती है जालीम जवानी
होती क्यों गौरा सब साजन सयानी
निष्ठूर निर्दयी तेरी यादें सताए
घिर आए मेघ पिया तुम न आए
मालुम जो होता की निष्ठुर हो राजा
बजवाते क्यों बाबा देहरी पे बाजा
अच्छा था रह जाती मैं बिना ब्याहे
घिर आए मेघ पिया तुम न आए
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