कविता मेरी ज़िन्दगी है
शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011
रुबाई - 8
क्यों नहीं हो रहा है तुमको यकीन
मेरे दिल मेरी मुहब्बत तुम हो
जैसे देखा था ख्वाब में तुमको
हाँ वही हाँ वही बिलकुल तुम हो
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