शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011

रुबाई - 9

सादगी    उसकी    निराली    देखी
मद   भरे   नयनों  की प्याली देखी
वैसे   उगते   हुए   सूरज  में  भी  न  पाया रंग
लाली जो देखी वो बस उसके ही गालों  पे देखी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें