शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011

यह प्यार का नशा है

लाख तुम छिपाओ
कुछ मत मुझे बताओ
यह प्यार का नशा है
सर चढ़के बोलता है

आखें तुम्हारी रक्तिम
क्यों हो रही अभी से 
तुम भींग क्यों रही हो
अनजान सी नमी से
तुम लाख सर हिलाओ
नज़रें भले चुराओ
यह प्यार का नशा है
सर चढ़के बोलता है

धड़कने तुम्हारे दिल की
क्यों तेज़ हो रही हैं
साँसों की तेरी उष्मा
सब भेद कह रही है
नाख़ून न चबाओ
तुम लाख भाग जाओ
यह प्यार का नशा है
सर चढ़के बोलता है

दर्पण के सामने जा
खुद उससे पूछ देखो
वह झूठ अगर कहे तो
तुम दोष मुझको देना
आँचल की ओट करके
मुँह न मुझे बिराओ
यह प्यार का नशा है
सर  चढ़के बोलता है

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