कविता मेरी ज़िन्दगी है
शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011
रुबाई - 7
तेरे गालों पे ज़िन्दगी देखी
तेरे ओठों पे फूल खिलते हैं
तेरी इन नीमबाज आँखों से
दिल को तस्कीन बहुत मिलते हैं
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