फूलों से आशियाँ सजा लेना
मैं जो रूठू तो तुम मना लेना
जैसे तड़पा रहा हूँ तुमको मैं
तुम भी तड़पा के कुछ मज़ा लेना
होश खोने लगूँ अगर मैं तो
अपने आँचल में तुम छुपा लेना
दूर तुमसे रहूँ भले जितना
एक आवाज़ पर बुला लेना
शक की सरहद पर पाँव मत रखना
अपना मत आशियाँ जला लेना
मैं जो रूठू तो तुम मना लेना
जैसे तड़पा रहा हूँ तुमको मैं
तुम भी तड़पा के कुछ मज़ा लेना
होश खोने लगूँ अगर मैं तो
अपने आँचल में तुम छुपा लेना
दूर तुमसे रहूँ भले जितना
एक आवाज़ पर बुला लेना
शक की सरहद पर पाँव मत रखना
अपना मत आशियाँ जला लेना
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें