कविता मेरी ज़िन्दगी है
गुरुवार, दिसंबर 29, 2011
रुबाई - 3
नींद आई तो ख्वाब देखा है
तेरा बागी शबाब देखा है
चेहरा लगता है जाना पहचाना
जैसे कोई गुलाब देखा है
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