कविता मेरी ज़िन्दगी है
गुरुवार, दिसंबर 29, 2011
रुबाई - 1
जितनी खुशिया मिले वह क्या कम है
जब मेरे पास तुम हो क्या गम है
प्यार जितना मैं दे सकू ले लो
आदमी की उम्र बहुत कम है
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