कविता मेरी ज़िन्दगी है
शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011
रुबाई - 10
जो खोजता था प्यार में वो सब कुछ मुझे मिला
मैं काँच था पर आपने हीरा बना दिया
हैं शब्द नहीं क्या करूँ तारीफ़ आपकी
ज़र्रे को आपने तो सितारा बना दिया
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