शनिवार, दिसंबर 31, 2011

दोहा 4

दिल जिसे चाहता उसे ही चुनों
प्यार करना है  तो मजबूत बनों

जलने वाले तो जला करते है
रोशनी दे सको - कंदील बनों

प्यार का नाम तुमसे रौशन हो
दोस्त ऐसा ही अलमगीर बनों

बनके दिखला दो मसीहा तुम भी
लोग पूजें तुम ऐसा पीर बनों

राहें उल्फत तो है काँटों का सफ़र
सच्चे प्रेमी की तरह धीर बनों

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