कविता मेरी ज़िन्दगी है

बुधवार, अगस्त 26, 2015

जानकीपुल: शुभम श्री की नई कविताएँ

जानकीपुल: शुभम श्री की नई कविताएँ

प्रस्तुतकर्ता Umar Chand Jaiswal पर 11:31 am कोई टिप्पणी नहीं:
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Umar Chand Jaiswal
कोई ख़ास साहित्यिक उपलब्धि नहीं | प्रारंभ में ४ - ५ कहानियां लिखीं जो पटना, दिल्ली और कलकत्ता के पत्रिकाओ क्रमश: नई धारा, श्रृंगार एवंम निवेदिता में छपी | मूलत: कवि | कुछ रुबाइयाँ, कुछ गीत भी लिखे | 'निवेदिता' नाम से एक अनियतकालीन पत्रिका के ६ - ७ अंको का प्रकाशन | निवेदिता का ही 'राजकमल चौधरी' स्मृति अंक भूपेंद्र अबोध के साथ मिलकर सम्पादन | एक अनियतकालीन पत्रिका 'वन्या' नाम से प्रकाशित और सम्पादित | अपनी रचनाओं के प्रकाशन के प्रति बहुत कम आसक्ति | Blog में रचनाए मेरे नाती प्रमित गुप्ता के प्रयास का नतीजा है | Mobile 9431763693 अंत में : - गीत, दोहा, नवगीत, रुबाई १९७० से ले कर १९८५ तक के बीच की रचनाएं है | नई कविताओं का रचनाकाल १९८५ से २0१0 के बीच की है |
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