इतनी गोराई भी अच्छी नही
ओ मेरे सोम
ना ही अच्छा है इतना छल
कभी दिखो
कभी छुपो
ठीक नहीं आँख मिचौली
माना तुम्हे देख
ह्रदय जुड़ाता है
आँखे तृप्त हो जाती है
लेकिन देखना
एक दिन तुम्हारी इन्ही दुष्टताओ के लिये
मै कवि
तुम्हे अपनी बिस्तर में कैद कर लूँगा
ओ मेरे सोम
बोलो
मेरी शिकायत तुम किससे करोगे ?