रविवार, जून 30, 2013

सोम

इतनी गोराई भी अच्छी नही
ना ही अच्छा है इतना छल 
कभी दिखो 
कभी छुपो 
ठीक नहीं आँख मिचौली

माना तुम्हे देख 
ह्रदय जुड़ाता है 
आँखे तृप्त हो जाती है 
लेकिन देखना 
एक दिन तुम्हारी इन्ही दुष्टताओ के लिये 
मै कवि 
तुम्हे अपनी बिस्तर में कैद कर लूँगा 

ओ मेरे सोम 
बोलो 
मेरी शिकायत तुम किससे करोगे ?

समय का फेर

सुबह -सुबह
हॉकर चिल्लाता है
आज की ताजा खबर
पचास  साल की अधेड़ औरत
बीस साल के लड़के को लेकर भाग गई

सुबह -सुबह
हॉकर चिल्लाता है
साठ साल के अधेड़ पुरुष ने
तेरह साल की लड़की के साथ
बलात्कार किया

किसी के लिये ये खबर है विस्मयकारी
किसी के लिये
समय का फेर  

क्यों

प्रिये जब तुम नहीं हो पास
इन बहारों का मैं क्या करूँ

जैसे ख़ुशियों का उपभोग
अकेले नहीं किया जा सकता

जैसे स्वयं से रूठने का कोई
अर्थ नहीं होता

वैसे ही
यह हसीन-रंगीन मौसम
यह उजला धुला चमकिला चाँद
दिलकश नज़ारे
सबकुछ तुम्हारे बिना
अर्थहीन हो जाते है

प्रिये
एक तुम्हारे नहीं रहने से
क्यों
जीवन का अर्थ
बैमानी हो जाता है  । 

मजा

मजा का
अपने - अपने परिपेक्ष मे 
विस्तृत  फलक होता है 

बच्चों को खेलने में मजा आता है 

किशोरों को लड़कियों को छेड़ने मे मजा आता है 

किसी -किसी को सताने में मजा आता है 

किसी -किसी को जलाने में मजा आता है 

बुद्धिजीवियों  को शराब की चुस्कियों में मजा आता है

मजदूरों को शराब की भट्ठियों में बैठ,
गप्पे लड़ाने में मजा आता है

मुझे मजा आता है
अपने कवि मित्रों से यह कहने में कि
                  मैं सदी का महान कवि हूँ

सचमुच मुझे बहुत मजा आता है ।