तुम्हारी तरह
अधुरी जिन्दगी जी रहा हूँ मैं
फर्क तो बस इतनी है
कि तुम तो आजाद हो
और मैं कैद
भाग्य की लिखावट में भले तुम विश्वास करो
मेरा मानना है
हम अपने भाग्य के निर्माता स्वय बन सकते हैं
प्रिय तुम साहस करो
मैं तुम्हारे साथ हूँ ।
अधुरी जिन्दगी जी रहा हूँ मैं
फर्क तो बस इतनी है
कि तुम तो आजाद हो
और मैं कैद
भाग्य की लिखावट में भले तुम विश्वास करो
मेरा मानना है
हम अपने भाग्य के निर्माता स्वय बन सकते हैं
प्रिय तुम साहस करो
मैं तुम्हारे साथ हूँ ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें