मुझे अच्छे लगते हैं
फूल ,नदी ,झरने ,औरत और पहाड़
मुझे घृणित लगते हैं
झूठ ,चोरी ,बेईमानी और चापलुसी
तुम मेरे विषय में कुछ भी धारणा बनाओ
मुझे पता है
मै अपनी सदी का एक अकेला कवि हूँ ।
फूल ,नदी ,झरने ,औरत और पहाड़
मुझे घृणित लगते हैं
झूठ ,चोरी ,बेईमानी और चापलुसी
तुम मेरे विषय में कुछ भी धारणा बनाओ
मुझे पता है
मै अपनी सदी का एक अकेला कवि हूँ ।
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