जब कभी तुम
मुझे करती हो भरपुर प्यार
मेरा मन आल्हादित हो उठता है
और मैं कविता लिखने बैठता हूँ
मैं कविता लिखने बैठता हूँ
जब किसी का कोई दर्द
मेरे दिल में समा जाते हैं
और किसी के आंसू
द्रवित कर मेरे हो जाते हैं
मैं कविता लिखने बैठता हूँ
मैं धूर्जटी सा भले रहूँ खामोश
पर मेरे रौद्र रूप पर
कितनों के सिंहासन हिल जाते हैं
मैं कलम गिरवी रखकर
कविता नहीं लिखता
मुझे करती हो भरपुर प्यार
मेरा मन आल्हादित हो उठता है
और मैं कविता लिखने बैठता हूँ
मैं कविता लिखने बैठता हूँ
जब किसी का कोई दर्द
मेरे दिल में समा जाते हैं
और किसी के आंसू
द्रवित कर मेरे हो जाते हैं
मैं कविता लिखने बैठता हूँ
मैं धूर्जटी सा भले रहूँ खामोश
पर मेरे रौद्र रूप पर
कितनों के सिंहासन हिल जाते हैं
मैं कलम गिरवी रखकर
कविता नहीं लिखता
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