चौरंगी के इस भीड़ भरे रास्ते में
मैं अकेला हूँ
उदास हूँ
सुबह का सूर्य जब थक कर
पश्चिम में विश्राम करने जाने लगता है
तब
हरी ,नीली ,पीली और लाल बत्तियों के साथ
चौरंगी पर एक रंगीन शाम उतर आती है
आफिसों की छुट्टियाँ होती हैं
मैटनी शो खत्म होता है
मैट्रों ,न्यू एम्पायर और लाइट -हाउस से
एक भीड़ निकल आती है
सेन्ट और लेवेंडर की महक
चौरंगी के भीड़ भरे रास्ते में तैर जाती है
और तब
फुटपाथों पर खड़े हुए
फाउन्टेन पेन ,घड़ियाँ ,खिलौने बेचने वाले
छोकरों की आवाजें तेज हो जाती हैं
काफी -हॉऊसों ,टी स्टालों तथा
पान की दूकानों पर
भीड़ जमा हो जाती है
और कहीं भीड़ से परे
अपने शरीर को बेचने वाली लड़की
होठों पे मुस्काराती है
आँखों के इशारे से पास बुलाती हैं
तब
चौरंगी के इस भीड़ भरे भरे रास्ते में
नगमा
मुझे तुम्हारी याद आती है
मैं अकेला हूँ
उदास हूँ
सुबह का सूर्य जब थक कर
पश्चिम में विश्राम करने जाने लगता है
तब
हरी ,नीली ,पीली और लाल बत्तियों के साथ
चौरंगी पर एक रंगीन शाम उतर आती है
आफिसों की छुट्टियाँ होती हैं
मैटनी शो खत्म होता है
मैट्रों ,न्यू एम्पायर और लाइट -हाउस से
एक भीड़ निकल आती है
सेन्ट और लेवेंडर की महक
चौरंगी के भीड़ भरे रास्ते में तैर जाती है
और तब
फुटपाथों पर खड़े हुए
फाउन्टेन पेन ,घड़ियाँ ,खिलौने बेचने वाले
छोकरों की आवाजें तेज हो जाती हैं
काफी -हॉऊसों ,टी स्टालों तथा
पान की दूकानों पर
भीड़ जमा हो जाती है
और कहीं भीड़ से परे
अपने शरीर को बेचने वाली लड़की
होठों पे मुस्काराती है
आँखों के इशारे से पास बुलाती हैं
तब
चौरंगी के इस भीड़ भरे भरे रास्ते में
नगमा
मुझे तुम्हारी याद आती है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें