पत्थर पूज या माटी पूज
जिसको दिल चाहे तू पूज
जो ढोंगी पाखण्डी हैं
चाहे तो उसको ही पूज
चारण बनके ही जीना जब
लूले-लंगड़े को भी पूज
सुविधा का पथ बहुत सरल हैं
सुख को चुन या दुख को पूज
जो तु चाहे आत्मतोष तो
पहले दीन -दुखी को पूज
तेरा आसन सबसे ऊँचा
तू आजाद कलम को पूज
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