भीड़ को देखता हूँ मैं
हर एक की आँखों में है भूख
नजरे पारदर्शी नायलोनी वस्त्रों को भेदकर
टटोलती हैं जिस्म
पैडो में बंधा हुआ है शरीर
उरानियत
शहरों से फैलकर
करबों तक पहूँच गई है
देह के भूगोल को देख व पढ़
अधेड़ और बुढ़े लोग
छुपकर पावरफुल गोलियाँ खाने लगे हैं ।
हर एक की आँखों में है भूख
नजरे पारदर्शी नायलोनी वस्त्रों को भेदकर
टटोलती हैं जिस्म
पैडो में बंधा हुआ है शरीर
उरानियत
शहरों से फैलकर
करबों तक पहूँच गई है
देह के भूगोल को देख व पढ़
अधेड़ और बुढ़े लोग
छुपकर पावरफुल गोलियाँ खाने लगे हैं ।
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