मेरे रकीबों को पता है
कविता मेरी महबुबा है
कितनी गलत फहमी में है मेरे रकीब
उन्हें पता नही
कविता मेरी बीवी है
जिन्हे पता है कविता मेरी बीवी है
वे भी कहा जान पायें हैं
मेरे और कविता के बीच के संबंध को
मेरे खुशकहम रकीबों
तुम बाज नही आओगे
दुसरों की जिन्दगी में झाकनें से
तो सुनो मैं बताता हूँ तुम्हें
कविता मेरी जिन्दगी है ।
कविता मेरी महबुबा है
कितनी गलत फहमी में है मेरे रकीब
उन्हें पता नही
कविता मेरी बीवी है
जिन्हे पता है कविता मेरी बीवी है
वे भी कहा जान पायें हैं
मेरे और कविता के बीच के संबंध को
मेरे खुशकहम रकीबों
तुम बाज नही आओगे
दुसरों की जिन्दगी में झाकनें से
तो सुनो मैं बताता हूँ तुम्हें
कविता मेरी जिन्दगी है ।
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